प्रयागराज का माघ मेला दुनियाभर में अद्भुत आध्यात्मिकता, आस्था और परंपराओं का एक विशाल संगम माना जाता है। धर्म, आस्था और मोक्ष की नगरी प्रयागराज में दुनिया के सबसे बड़े आध्यात्मिक समागम के लिए तैयार हो रही है। संगम के रेतीले तट पर Prayagraj Magh Mela 2026 की तैयारियां जोरों पर हैं। हर साल की तरह इस साल भी गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम पर इस बार इस बार मेले में 15 करोड़ श्रद्धालु के आने की सम्भावना है। इस बार का माघ मेला कई मायनों में खास होने वाला है। प्रशासन के अनुमान और ज्योतिषीय गणना के अनुसार, यह मेला 44 दिनों तक चलेगा।
Prayagraj Magh Mela 2026: एक नज़र में (Event Overview)
2026 का माघ मेला कई नए बदलावों और बड़ी तैयारियों के कारण विशेष माना जा रहा है। संगम तटों पर आधुनिक सुविधाओं का विस्तार किया गया है ताकि आने वाले श्रद्धालुओं को परेशानी ना उठानी पड़े। प्रशासन का अनुमान है कि इस बार देश-विदेश से लगभग 12 से 15 करोड़ श्रद्धालु संगम नगरी में पहुंचेंगे। इतनी विशाल भीड़ को देखते हुए सुरक्षा और सुविधाओं के कड़े इंतज़ाम किए जा रहे हैं।
श्रद्धालुओं के लिए बड़ी खबर: चलेंगी 275 शटल बसें
इतनी भारी भीड़ को देखते हुए, उत्तर प्रदेश सरकार और स्थानीय प्रशासन ने कमर कस ली है। अगर आप बस या ट्रेन से प्रयागराज आ रहे हैं, तो आपको संगम तक पहुँचने के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। नगरीय परिवहन निदेशालय, लखनऊ और रोडवेज ने संयुक्त रूप से एक बड़ा फैसला लिया है। मेला अवधि के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष रूप से 274 शटल बसों का संचालन किया जाएगा, इनमे कुछ बसे इलेक्ट्रिक भी होगी।
Prayagraj Magh Mela 2026: स्नान की प्रमुख तिथियां
पौष पूर्णिमा – 3 जनवरी 2026 (मेला और कल्पवास का शुभारंभ)
माघ मेले का पहला स्नान 3 जनवरी को पौष पूर्णिमा के दिन होगा। हिंदू धर्म में इस दिन का विशेष महत्व है। इसी दिन से आधिकारिक रूप से माघ मेले की शुरुआत होती है।
मकर संक्रांति – 14 जनवरी 2026 (शाही स्नान)
दूसरा और बेहद महत्वपूर्ण स्नान 14 जनवरी को है। जब सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं, तो इसे मकर संक्रांति कहा जाता है। इसे सूर्य के उत्तरायण होने का पर्व भी माना जाता है। Prayagraj Magh Mela 2026 में इस दिन अखाड़ों के साधु-संतों का शाही स्नान आकर्षण का केंद्र होता है।
मौनी अमावस्या – 18 जनवरी 2026 (सबसे बड़ा स्नान)
पूरे माघ मेले का सबसे बड़ा और भीड़भाड़ वाला दिन मौनी अमावस्या का होता है। 2026 में यह 18 जनवरी को पड़ रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन संगम के जल में देवताओं का वास होता है। इसे ‘अमृत स्नान’ भी कहा जाता है।
वसंत पंचमी – 23 जनवरी 2026 (सरस्वती पूजा)
ऋतुराज वसंत का आगमन वसंत पंचमी से होता है। 23 जनवरी को होने वाले इस स्नान का संबंध ज्ञान की देवी मां सरस्वती से है। संगम, जिसे त्रिवेणी भी कहा जाता है, में सरस्वती नदी का भी वास माना जाता है, इसलिए इस दिन यहाँ स्नान का महत्व बढ़ जाता है।
माघी पूर्णिमा – 1 फरवरी 2026 (कल्पवासियों का मुख्य स्नान)
माघी पूर्णिमा कल्पवासियों के लिए एक भावुक क्षण होता है। 1 फरवरी को पड़ने वाले इस स्नान के साथ ही कल्पवासियों का एक महीने का कठिन व्रत लगभग पूरा हो जाता है।
महाशिवरात्रि – 15 फरवरी 2026 (मेले का समापन)
Prayagraj Magh Mela 2026 का अंतिम स्नान महाशिवरात्रि के दिन 15 फरवरी को होगा। यह भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह का उत्सव है। इस दिन आखिरी डुबकी के साथ ही 44 दिनों तक चलने वाले इस विशाल मेले का समापन हो जाएगा।
निष्कर्ष (Conclusion)
Prayagraj Magh Mela 2026 न केवल भारत की संस्कृति का प्रतीक है, बल्कि यह दुनिया को यह दिखाता है कि आस्था किस तरह करोड़ों लोगों को एक धागे में पिरो सकती है। करोड़ों श्रद्धालुओं के आगमन, बेहतर परिवहन, मजबूत सुरक्षा और विस्तृत व्यवस्थाओं के साथ यह मेला न सिर्फ भारत बल्कि विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन बनने की ओर अग्रसर है। 3 जनवरी से 15 फरवरी 2026 के बीच आप अपनी सुविधा अनुसार किसी भी तारीख को यहाँ आ सकते हैं।
Read More: सावधान! UIDAI ने बंद किए 2 करोड़ से ज्यादा आधार कार्ड, चेक करें लिस्ट और कारण।
नोट: यह जानकारी वर्तमान घोषणाओं और पंचांग पर आधारित है। यात्रा से पहले एक बार स्थानीय प्रशासन की लेटेस्ट गाइडलाइन्स जरूर चेक करें।



