क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है कि रात के 2 बज रहे हों, सब सो रहे हों, लेकिन आपकी आंखों से नींद गायब है? हम सभी कभी न कभी ज़रूरत से ज़्यादा सोचते हैं। लेकिन जब सोचना एक ऐसी आदत बन जाए जो हमें चैन से रहने न दे – यही Overthinking है। लेकिन जब यह आदत बन जाए, तो यह आपकी खुशियां, आपकी नींद को दीमक की तरह खाने लगती है। मैं आपको बताने वाला हूँ How to Stop Overthinking यानी ओवरथिंकिंग को रोकने के व्यावहारिक और आजमाए हुए तरीके।
Overthinking क्या है और यह खतरनाक क्यों है?
जब आप किसी समस्या का हल निकालने के लिए सोचते हैं, तो वह ‘Thinking’ है। लेकिन जब आप उस समस्या के बारे में सिर्फ सोचते रहते हैं, डरावने नतीजे सोचते हैं और कोई हल नहीं निकलता तो वह Overthinking है। ओवरथिंकिंग का मतलब है एक ही बात को बार-बार सोचना या सक करना।
मनोविज्ञान (Psychology) के अनुसार, ज्यादा सोचने से हमारे दिमाग में ‘Cortisol’ (स्ट्रेस हॉर्मोन) बढ़ जाता है। इसके नुकसान सिर्फ मानसिक नहीं, शारीरिक भी हैं। जैसे नींद न आना, फैसले लेने में दिक्कत होना, हमेशा थका हुआ महसूस करना और पाचन तंत्र खराब होना ये सब लक्षण Overthinking के है। अगर आप जानना चाहते हैं कि How to Stop Overthinking. तो सबसे पहले आपको अपनी आदत को बदलना होगा।
प्रैक्टिकल तरीके: How to Stop Overthinking
Overthinking हवा में शुरू नहीं होती और न ही इसका कोई जरुरी कारण होता है। आप विचारों में फंसे तो एक पल रुकें और खुद से पूछें क्या मैं किसी खास इंसान से मिलने के बाद ज्यादा सोचता हूँ? या सोशल मीडिया देखने के बाद मुझे जलन महसूस या फिर आपको भविष्य का डर है। अगर आप अपने ट्रिगर को पहचान लेते हैं, तो यही आपकी बदलाव की पहली सीढ़ी होगी।
माइंडफुलनेस और ध्यान
माइंडफुलनेस का अभ्यास करके आप अपने लक्ष्य पर फोकस करना सीख सकते हैं। रोज़ाना मेडिटेशन और योग करने से दिमाग शांत रहता है और अनचाहे विचार काम आते है। सिर्फ़ रोज 1 घंटा मेडिटेशन और योग जरूर करे।
परफेक्शन (Perfectionism) के पीछे भागना छोड़ें
हमेशा ओवरथिंकर्स काम शुरू करने से पहले ही सोचने लग जाते है अगर मैं फेल हो गया तो? या अगर लोगों ने मजाक उड़ाया तो? एक बात हमेसा याद रखे “Done is better than perfect.” गलती करने से डरना ही ओवरथिंकिंग की जड़ है। छोटे कदम उठाएं और आगे चलते रहे।
चीजों को लिखना शुरू करें (Start Journaling)
दिन भर में जब भी आपको टाइम लगे तो अपने विचारों को कागज़ पर लिखना या जर्नल बनाना बेहद असरदार है। जब आप अपनी समस्याओं को लिखते हैं। इससे मन की उलझनें साफ़ होती हैं और आप अपने ट्रिगर और पैटर्न पहचान पाते हैं।
5-4-3-2-1 ग्राउंडिंग टेक्निक
यह एक बहुत ही पावरफुल मनोवैज्ञानिक तकनीक है जिसे Grounding Technique कहते हैं। जब भी आपको लगे कि आपका दिमाग आउट ऑफ़ कंट्रोल है, तो उस दौरान धीरे-धीरे पाँच से एक तक उल्टी गिनती करें। और अपनी पाँचों इंद्रियों को पल नोट करें। यह तकनीक आपके दिमाग को “भविष्य या भूतकाल” से खींचकर “वर्तमान” में ले आती है।
समाधान पर फोकस करें, समस्या पर नहीं (Solution vs Problem Mindset)
हमें ओवरथिंकिंग तब ही होती है जब हम ‘क्यों’ (Why) में फंस जाते हैं। मेरे साथ ही ऐसा क्यों हुआ? उसने ऐसा क्यों कहा? जब आप एक्शन मोड में आते हैं, तो ओवरथिंकिंग अपने आप खत्म हो जाती है।
Conclusion:
ओवरथिंकिंग से बाहर निकलने में समय लगता है, लेकिन यह पूरी तरह संभव है। बस आप आपने सोशल सर्कल बढ़ाएँ और दोस्तों और परिवार के साथ समय बिताएँ। जरूरत पड़े तो मनोवैज्ञानिक या काउंसलर से सलाह लें। फोन, सोशल मीडिया का कम प्रयोग करे ताकि बाहरी जानकारी का बोझ कम हो। यह प्रैक्टिस, समझ, और लगातार छोटे-छोटे कदम उठाने से संभव है। अपने विचारों को पहचानें, चुनौती दें और और जीवन का आनंद लें।
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Disclaimer: यह ब्लॉग केवल सामान्य जानकारी के लिए है, इसे प्रोफेशनल मेडिकल सलाह न समझें; गंभीर समस्या होने पर डॉक्टर से संपर्क करें।



